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विदेश मंत्रालय ने कहा- एलएसी पर मौजूदा स्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश नहीं होने देंगे; चीन ने डोकलाम के पास परमाणु बॉम्बर और क्रूज मिसाइल तैनात किए


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नई दिल्ली3 घंटे पहले

भूटान से लगे डोकलाम के पास चीन अपने गोलमुड एयरबेस पर हथियारों की तैनाती कर रहा है। (फाइल फोटो)

  • लद्दाख में चीन के पीछे हटने के साफ संकेत मिलने तक भारत पैंगॉन्ग की ऊंची पहाड़ियों पर डटा रहेगा
  • सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत-चीन के कॉर्प्स कमांडर अब तक 6 बार मीटिंग कर चुके

सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच अगले राउंड की बातचीत जल्द हो सकती है। इससे पहले विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि डिसएंगेजमेंट एक मुश्किल (कॉम्प्लेक्स) प्रोसेस है, इसके लिए दोनों तरफ से सहमति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होगी। मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि अब इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि एलएसी पर मौजूदा स्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश नहीं हो पाए।

चीन ने भारतीय सीमा से 1150 किमी दूर हथियार तैनात किए
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव को कम करने के लिए आर्मी और डिप्लोमेटिक लेवल पर भले ही बातचीत चल रही हो, लेकिन चीन पीठ पीछे चाल चलने से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने भूटान से लगे डोकलाम के पास अपने एच-6 परमाणु बॉम्‍बर और क्रूज मिसाइल को तैनात किया है। चीन इन हथियारों की तैनाती अपने गोलमुड एयरबेस पर कर रहा है, जो भारतीय सीमा से सिर्फ 1150 किलोमीटर दूर है।

सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत-चीन के कॉर्प्स कमांडर अब तक 6 बार मीटिंग कर चुके हैं। कोर कमांडरों की बैठक के बाद भले ही दोनों पक्ष एलएसी पर मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की कोशिश में हैं, लेकिन भारत सतर्क है। भारतीय सेना ने तय किया है चीन के पीछे हटने के साफ संकेत मिलने तक पैंगॉन्ग की ऊंची पहाड़ियों पर हमारे जवान डटे रहेंगे।

दूसरी तरफ विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि भारत और चीन एक अजीब (अन्प्रेसिडेन्टिड) स्थिति में हैं। इस बीच सीमा विवाद एक बड़ा मुद्दा है। यह बात अहम है कि दोनों देश एक-दूसरे की जरूरतों को भी समझते हैं। भारत-चीन को मिलकर समाधान तलाशना चाहिए। विदेश मंत्री ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में ये बात कही।

ट्रम्प ने फिर मदद का ऑफर दिया, नोबेल पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा, “मैं जानता हूं कि भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर मुश्किल में हैं, लेकिन उम्मीद है कि वे विवाद सुलझा लेंगे। इसमें हम कोई मदद कर सकें तो अच्छा लगेगा।”

कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रम्प की नजर शांति के नोबेल प्राइज पर है। इसलिए, वे भारत-चीन के मामले में दखल का ऑफर एक बार रिजेक्ट होने के बाद फिर से दोहरा रहे हैं। नॉर्वे की संसद के एक सदस्य ने ट्रम्प को नोबेल के लिए नॉमिनेट किया है। यूएई और इजरायल के बीच डिप्लोमेटिक रिश्तों में मदद करने की वजह से ट्रम्प के नाम का प्रपोजल रखा गया है।



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